श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

प्रचेतसः पितुर्वाक्यं शिरसाऽऽदाय साधवः।

दिशं प्रतीचीं प्रययुस्तपस्यादृतचेतसः॥ १९

pracetasaḥ piturvākyaṃ śirasā''dāya sādhavaḥ|

diśaṃ pratīcīṃ prayayustapasyādṛtacetasaḥ|| 19

अर्थ

श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! साधुस्वभाव प्रचेतागण पिताकी आज्ञा शिरोधार्य कर तपस्यामें चित्त लगा पश्चिमकी ओर चल दिये॥ १९॥

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