श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

विबुधासुरगन्धर्वमुनिसिद्धनरोरगाः ।

विजिताः सूर्यया दिक्षु क्‍वणयन्त्यैव नूपुरैः॥ १२

vibudhāsuragandharvamunisiddhanaroragāḥ |

vijitāḥ sūryayā dikṣu kvaṇayantyaiva nūpuraiḥ|| 12

अर्थ

नवविवाहिता शतद्रुतिने अपने नूपुरोंकी झनकारसे ही दिशा-विदिशाओंके देवता, असुर, गन्धर्व, मुनि, सिद्ध, मनुष्य और नाग—सभीको वशमें कर लिया था॥ १२॥✎ 1606

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1606 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: नव-विवाहिता → नवविवाहिता

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