॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.23.34
अस्पष्टकीर्तिः सुयशा मूर्खो भवति पण्डितः।
इदं स्वस्त्ययनं पुंसाममंगल्यनिवारणम्॥ ३४
aspaṣṭakīrtiḥ suyaśā mūrkho bhavati paṇḍitaḥ|
idaṃ svastyayanaṃ puṃsāmamaṃgalyanivāraṇam|| 34
अर्थ
स्त्री हो अथवा पुरुष—जो कोई इसे आदरपूर्वक तीन बार सुनता है, वह सन्तानहीन हो तो पुत्रवान्, धनहीन हो तो महाधनी, कीर्तिहीन हो तो यशस्वी और मूर्ख हो तो पण्डित हो जाता है। यह चरित मनुष्यमात्रका कल्याण करनेवाला और अमंगलको दूर करनेवाला है॥ ३३-३४॥✎ 411