yasya vo darśanaṃ hyāsīddurdarśānāṃ ca yogibhiḥ|| 7
अर्थ
पृथुजीने कहा—मंगलमूर्ति मुनीश्वरो! आपके दर्शन तो योगियोंको भी दुर्लभ हैं; मुझसे ऐसा क्या पुण्य बना है जिससे स्वतः आपका दर्शन प्राप्त हुआ॥ ७॥
अहो आचरितं किं मे मंगलं मंगलायनाः।
यस्य वो दर्शनं ह्यासीद्दुर्दर्शानां च योगिभिः॥ ७
पृथुजीने कहा—मंगलमूर्ति मुनीश्वरो! आपके दर्शन तो योगियोंको भी दुर्लभ हैं; मुझसे ऐसा क्या पुण्य बना है जिससे स्वतः आपका दर्शन प्राप्त हुआ॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 512) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/22/7/