श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.18

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अयं तु देवयजन इन्द्रोपेन्द्रादिभिर्भवः।

सह भागं न लभतां देवैर्देवगणाधमः॥ १८

ayaṃ tu devayajana indropendrādibhirbhavaḥ|

saha bhāgaṃ na labhatāṃ devairdevagaṇādhamaḥ|| 18

अर्थ

दक्षने कहा, ‘यह महादेव देवताओंमें बड़ा ही अधम है। अबसे इसे इन्द्र-उपेन्द्र आदि देवताओंके साथ यज्ञका भाग न मिले’॥ १८॥

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