श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.19.40

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

कृतावभृथस्नानाय पृथवे भूरिकर्मणे।

वरान्ददुस्ते वरदा ये तद्बर्हिषि तर्पिताः॥ ४०

kṛtāvabhṛthasnānāya pṛthave bhūrikarmaṇe|

varāndaduste varadā ye tadbarhiṣi tarpitāḥ|| 40

अर्थ

इसके पश्चात् जब वे यज्ञान्त स्नान करके निवृत्त हुए, तब उनके यज्ञोंसे तृप्त हुए देवताओंने उन्हें अभीष्ट वर दिये॥ ४०॥

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