इन्द्रकी इस कुचालका पता लगनेपर परम पराक्रमी महाराज पृथुको बड़ा क्रोध हुआ। उन्होंने अपना धनुष उठाकर उसपर बाण चढ़ाया॥ २६॥
तदभिज्ञाय भगवान् पृथुः पृथुपराक्रमः।
इन्द्राय कुपितो बाणमादत्तोद्यतकार्मुकः॥ २६
इन्द्रकी इस कुचालका पता लगनेपर परम पराक्रमी महाराज पृथुको बड़ा क्रोध हुआ। उन्होंने अपना धनुष उठाकर उसपर बाण चढ़ाया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 498) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/26/