श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.29

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

चूर्णयन्२ स्वधनुष्कोट्या गिरिकूटानि राजराट्।

भूमण्डलमिदं वैन्यः प्रायश्‍चक्रे समं विभुः॥ २९

cūrṇayan svadhanuṣkoṭyā girikūṭāni rājarāṭ|

bhūmaṇḍalamidaṃ vainyaḥ prāyaścakre samaṃ vibhuḥ|| 29

अर्थ

फिर राजाधिराज पृथुने अपने धनुषकी नोकसे पर्वतोंको फोड़कर इस सारे भूमण्डलको प्रायः समतल कर दिया॥ २९॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—चूर्णयंश्‍च धनु०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 495)

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