श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.16.5

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

एष वै लोकपालानां बिभर्त्येकस्तनौ तनूः।

काले काले यथाभागं लोकयोरुभयोर्हितम्॥ ५

eṣa vai lokapālānāṃ bibhartyekastanau tanūḥ|

kāle kāle yathābhāgaṃ lokayorubhayorhitam|| 5

अर्थ

ये अकेले ही समय-समयपर प्रजाके पालन, पोषण और अनुरंजन आदि कार्यके अनुसार अपने शरीरमें भिन्‍न-भिन्‍न लोकपालोंकी मूर्तिको धारण करेंगे तथा यज्ञ आदिके प्रचारद्वारा स्वर्गलोक और वृष्टिकी व्यवस्थाद्वारा भूलोक—दोनोंका ही हित साधन करेंगे॥ ५॥

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