श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.16.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नादण्ड्यं दण्डयत्येष सुतमात्मद्विषामपि।

दण्डयत्यात्मजमपि दण्ड्यं धर्मपथे स्थितः॥ १३

nādaṇḍyaṃ daṇḍayatyeṣa sutamātmadviṣāmapi|

daṇḍayatyātmajamapi daṇḍyaṃ dharmapathe sthitaḥ|| 13

अर्थ

ये धर्ममार्गमें स्थित रहकर अपने शत्रुके पुत्रको भी, दण्डनीय न होनेपर, कोई दण्ड न देंगे और दण्डनीय होनेपर तो अपने पुत्रको भी दण्ड देंगे॥ १३॥

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