सुन्दर वस्त्र और आभूषणोंसे अलंकृत महाराज पृथुका विधिवत् राज्याभिषेक हुआ। उस समय अनेकों अलंकारोंसे सजी हुई महारानी अर्चिके साथ वे दूसरे अग्निदेवके सदृश जान पड़ते थे॥ १३॥
सोऽभिषिक्तो महाराजः सुवासाः साध्वलङ्कृतः।
पत्न्यार्चिषालङ्कृतया विरेजेऽग्निरिवापरः॥ १३
सुन्दर वस्त्र और आभूषणोंसे अलंकृत महाराज पृथुका विधिवत् राज्याभिषेक हुआ। उस समय अनेकों अलंकारोंसे सजी हुई महारानी अर्चिके साथ वे दूसरे अग्निदेवके सदृश जान पड़ते थे॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 484) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/15/13/