॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.14.46
तस्य वंश्यास्तु नैषादा गिरिकाननगोचराः।
येनाहरज्जायमानो वेनकल्मषमुल्बणम्॥ ४६
tasya vaṃśyāstu naiṣādā girikānanagocarāḥ|
yenāharajjāyamāno venakalmaṣamulbaṇam|| 46
अर्थ
उसने जन्म लेते ही राजा वेनके भयंकर पापोंको अपने ऊपर ले लिया, इसीलिये उसके वंशधर नैषाद भी हिंसा, लूट-पाट आदि पापकर्मोंमें रत रहते हैं; अतः वे गाँव और नगरमें न टिककर वन और पर्वतोंमें ही निवास करते हैं॥ ४६॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां चतुर्थस्कन्धे पृथुचरिते
निषादोत्पत्तिर्नाम चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥