भगवान् ब्रह्मादि जगदीश्वरोंके भी ईश्वर हैं, उनके प्रसन्न होनेपर कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं रह जाती। तभी तो इन्द्रादि लोकपालोंके सहित समस्त लोक उन्हें बड़े आदरसे पूजोपहार समर्पण करते हैं॥ २०॥
तस्मिंस्तुष्टे किमप्राप्यं जगतामीश्वरेश्वरे।
लोकाः सपाला ह्येतस्मै हरन्ति बलिमादृताः॥ २०
भगवान् ब्रह्मादि जगदीश्वरोंके भी ईश्वर हैं, उनके प्रसन्न होनेपर कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं रह जाती। तभी तो इन्द्रादि लोकपालोंके सहित समस्त लोक उन्हें बड़े आदरसे पूजोपहार समर्पण करते हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 480) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/20/