इस प्रकार राजा अंगको पुत्रप्राप्ति करानेका निश्चय कर ऋत्विजोंने पशुमें यज्ञरूपसे रहनेवाले श्रीविष्णुभगवान्के पूजनके लिये पुरोडाश नामक चरु समर्पण किया॥ ३५॥
इति व्यवसिता विप्रास्तस्य राज्ञः प्रजातये।
पुरोडाशं निरवपन् शिपिविष्टाय विष्णवे॥ ३५
इस प्रकार राजा अंगको पुत्रप्राप्ति करानेका निश्चय कर ऋत्विजोंने पशुमें यज्ञरूपसे रहनेवाले श्रीविष्णुभगवान्के पूजनके लिये पुरोडाश नामक चरु समर्पण किया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/35/