श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

विदुर उवाच

के ते प्रचेतसो नाम कस्यापत्यानि सुव्रत।

कस्यान्ववाये प्रख्याताः कुत्र वा सत्रमासत॥ २

ke te pracetaso nāma kasyāpatyāni suvrata|

kasyānvavāye prakhyātāḥ kutra vā satramāsata|| 2

अर्थ

विदुरजीने पूछा—भगवत्परायण मुने! ये प्रचेता कौन थे? किसके पुत्र थे? किसके वंशमें प्रसिद्ध थे और इन्होंने कहाँ यज्ञ किया था?॥ २॥✎ 386

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #386 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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