श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

मत्वा तं जडमुन्मत्तं कुलवृद्धाः समन्त्रिणः।

वत्सरं भूपतिं चक्रुर्यवीयांसं भ्रमेः सुतम्॥ ११

matvā taṃ jaḍamunmattaṃ kulavṛddhāḥ samantriṇaḥ|

vatsaraṃ bhūpatiṃ cakruryavīyāṃsaṃ bhrameḥ sutam|| 11

अर्थ

इसलिये कुलके बड़े-बूढ़े तथा मन्त्रियोंने उसे मूर्ख और पागल समझकर उसके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सरको राजा बनाया॥ ११॥

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