tatra tatra praśaṃsadbhiḥ pathi vaimānikaiḥ suraiḥ|
avakīryamāṇo dadṛśe kusumaiḥ kramaśo grahān|| 34
अर्थ
उन्होंने क्रमशः सूर्य आदि सभी ग्रह देखे। मार्गमें जहाँ-तहाँ विमानोंपर बैठे हुए देवता उनकी प्रशंसा करते हुए फूलोंकी वर्षा करते जाते थे॥ ३४॥
तत्र तत्र प्रशंसद्भिः पथि वैमानिकैः सुरैः।
अवकीर्यमाणो ददृशे कुसुमैः क्रमशो ग्रहान्॥ ३४
उन्होंने क्रमशः सूर्य आदि सभी ग्रह देखे। मार्गमें जहाँ-तहाँ विमानोंपर बैठे हुए देवता उनकी प्रशंसा करते हुए फूलोंकी वर्षा करते जाते थे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 471) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/34/