श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.21

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

विज्ञाय तावुत्तमगायकिङ्करा-

वभ्युत्थितः साध्वसविस्मृतक्रमः।

ननाम नामानि गृणन्मधुद्विषः

पार्षत्प्रधानाविति संहतांजलिः॥ २१

vijñāya tāvuttamagāyakiṅkarā-

vabhyutthitaḥ sādhvasavismṛtakramaḥ|

nanāma nāmāni gṛṇanmadhudviṣaḥ

pārṣatpradhānāviti saṃhatāṃjaliḥ|| 21

अर्थ

उन्हें पुण्यश्लोक श्रीहरिके सेवक जान ध्रुवजी हड़बड़ाहटमें पूजा आदिका क्रम भूलकर सहसा खड़े हो गये और ये भगवान्‌के पार्षदोंमें प्रधान हैं—ऐसा समझकर उन्होंने श्रीमधुसूदनके नामोंका कीर्तन करते हुए उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया॥ २१॥

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