इसी समय ध्रुवजीने आकाशसे एक बड़ा ही सुन्दर विमान उतरते देखा। वह अपने प्रकाशसे दसों दिशाओंको आलोकित कर रहा था; मानो पूर्णिमाका चन्द्र ही उदय हुआ हो॥ १९॥
स ददर्श विमानाग्र्यं नभसोऽवतरद् ध्रुवः।
विभ्राजयद्दश दिशो राकापतिमिवोदितम्॥ १९
इसी समय ध्रुवजीने आकाशसे एक बड़ा ही सुन्दर विमान उतरते देखा। वह अपने प्रकाशसे दसों दिशाओंको आलोकित कर रहा था; मानो पूर्णिमाका चन्द्र ही उदय हुआ हो॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 469) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/12/19/