इस प्रकार तरह-तरहके ऐश्वर्यभोगसे पुण्यका और भोगोंके त्यागपूर्वक यज्ञादि कर्मोंके अनुष्ठानसे पापका क्षय करते हुए उन्होंने छत्तीस हजार वर्षतक पृथ्वीका शासन किया॥ १३॥
षट्त्रिंशद्वर्षसाहस्रं शशास क्षितिमण्डलम्।
भोगैः पुण्यक्षयं कुर्वन्नभोगैरशुभक्षयम्॥ १३
इस प्रकार तरह-तरहके ऐश्वर्यभोगसे पुण्यका और भोगोंके त्यागपूर्वक यज्ञादि कर्मोंके अनुष्ठानसे पापका क्षय करते हुए उन्होंने छत्तीस हजार वर्षतक पृथ्वीका शासन किया॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 469) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/13/