svaśaktyā māyayā yuktaḥ sṛjatyatti ca pāti ca|| 26
अर्थ
वे सम्पूर्ण प्राणियोंके अन्तरात्मा, नियन्ता और रक्षा करनेवाले प्रभु ही अपनी मायाशक्तिसे युक्त होकर समस्त जीवोंका सृजन, पालन और संहार करते हैं॥ २६॥✎ 381
एष भूतानि भूतात्मा भूतेशो भूतभावनः।
स्वशक्त्या मायया युक्तः सृजत्यत्ति च पाति च॥ २६
वे सम्पूर्ण प्राणियोंके अन्तरात्मा, नियन्ता और रक्षा करनेवाले प्रभु ही अपनी मायाशक्तिसे युक्त होकर समस्त जीवोंका सृजन, पालन और संहार करते हैं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 466) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/11/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)