श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.15

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

भूतैः पंचभिरारब्धैर्योषित्पुरुष एव हि।

तयोर्व्यवायात्सम्भूतिर्योषित्पुरुषयोरिह ॥ १५

bhūtaiḥ paṃcabhirārabdhairyoṣitpuruṣa eva hi|

tayorvyavāyātsambhūtiryoṣitpuruṣayoriha || 15

अर्थ

बेटा ध्रुव! देहादिके रूपमें परिणत हुए पंचभूतोंसे स्त्री-पुरुषका आविर्भाव होता है और फिर उनके पारस्परिक समागमसे दूसरे स्त्री-पुरुष उत्पन्‍न होते हैं॥ १५॥✎ 379 380

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #379 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #380 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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