॥ श्रीहरिः ॥
स तानापततो वीर उग्रधन्वा महारथः।
एकैकं युगपत्सर्वानहन् बाणैस्त्रिभिस्त्रिभिः॥ ८
sa tānāpatato vīra ugradhanvā mahārathaḥ|
ekaikaṃ yugapatsarvānahan bāṇaistribhistribhiḥ|| 8
अर्थ
महारथी ध्रुव प्रचण्ड धनुर्धर थे। उन्होंने एक ही साथ उनमेंसे प्रत्येकको तीन-तीन बाण मारे॥ ८॥
स तानापततो वीर उग्रधन्वा महारथः।
एकैकं युगपत्सर्वानहन् बाणैस्त्रिभिस्त्रिभिः॥ ८
महारथी ध्रुव प्रचण्ड धनुर्धर थे। उन्होंने एक ही साथ उनमेंसे प्रत्येकको तीन-तीन बाण मारे॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 461) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/10/8/