श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.10.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

इलायामपि भार्यायां वायोः पुत्र्यां महाबलः।

पुत्रमुत्कलनामानं योषिद्रत्नमजीजनत्॥ २

ilāyāmapi bhāryāyāṃ vāyoḥ putryāṃ mahābalaḥ|

putramutkalanāmānaṃ yoṣidratnamajījanat|| 2

अर्थ

महाबली ध्रुवकी दूसरी स्त्री वायुपुत्री इला थी। उससे उनके उत्कल नामके एक पुत्र और एक कन्यारत्नका जन्म हुआ॥ २॥

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