महादेवजीकी पत्नी सती थीं, वे सब प्रकारसे अपने पतिदेवकी सेवामें संलग्न रहनेवाली थीं। किन्तु उनके अपने गुण और शीलके अनुरूप कोई पुत्र नहीं हुआ॥ ६५॥
भवस्य पत्नी तु सती भवं देवमनुव्रता।
आत्मनः सदृशं पुत्रं न लेभे गुणशीलतः॥ ६५
महादेवजीकी पत्नी सती थीं, वे सब प्रकारसे अपने पतिदेवकी सेवामें संलग्न रहनेवाली थीं। किन्तु उनके अपने गुण और शीलके अनुरूप कोई पुत्र नहीं हुआ॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 411) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/65/