॥ श्रीहरिः ॥
त्रयोदशादाद्धर्माय तथैकामग्नये विभुः।
पितृभ्य एकां युक्तेभ्यो भवायैकां भवच्छिदे॥ ४८
trayodaśādāddharmāya tathaikāmagnaye vibhuḥ|
pitṛbhya ekāṃ yuktebhyo bhavāyaikāṃ bhavacchide|| 48
अर्थ
भगवान् दक्षने उनमेंसे तेरह धर्मको, एक अग्निको, एक समस्त पितृगणको और एक संसारका संहार करनेवाले तथा जन्म-मृत्युसे छुड़ानेवाले भगवान् शंकरको दी॥ ४८॥
त्रयोदशादाद्धर्माय तथैकामग्नये विभुः।
पितृभ्य एकां युक्तेभ्यो भवायैकां भवच्छिदे॥ ४८
भगवान् दक्षने उनमेंसे तेरह धर्मको, एक अग्निको, एक समस्त पितृगणको और एक संसारका संहार करनेवाले तथा जन्म-मृत्युसे छुड़ानेवाले भगवान् शंकरको दी॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/48/