श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.46

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

त एते मुनयः क्षत्तर्लोकान् सर्गैरभावयन्।

एष कर्दमदौहित्रसंतानः कथितस्तव।

शृण्वतः श्रद्दधानस्य सद्यः पापहरः परः॥ ४६

ta ete munayaḥ kṣattarlokān sargairabhāvayan|

eṣa kardamadauhitrasaṃtānaḥ kathitastava|

śṛṇvataḥ śraddadhānasya sadyaḥ pāpaharaḥ paraḥ|| 46

अर्थ

विदुरजी! इन सब मुनीश्‍वरोंने भी सन्तान उत्पन्‍न करके सृष्टिका विस्तार किया। इस प्रकार मैंने तुम्हें यह कर्दमजीके दौहित्रोंकी सन्तानका वर्णन सुनाया। जो पुरुष इसे श्रद्धापूर्वक सुनता है, उसके पापोंको यह तत्काल नष्ट कर देता है॥ ४६॥

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