श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.33

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सोमोऽभूद्ब्रह्मणोंऽशेन दत्तो विष्णोस्तु योगवित्।

दुर्वासाः शङ्करस्यांशो निबोधाङ्गिरसः प्रजाः॥ ३३

somo'bhūdbrahmaṇoṃ'śena datto viṣṇostu yogavit|

durvāsāḥ śaṅkarasyāṃśo nibodhāṅgirasaḥ prajāḥ|| 33

अर्थ

ब्रह्माजीके अंशसे चन्द्रमा, विष्णुके अंशसे योगवेत्ता दत्तात्रेयजी और महादेवजीके अंशसे दुर्वासा ऋषि अत्रिके पुत्ररूपमें प्रकट हुए। अब अंगिरा ऋषिकी सन्तानोंका वर्णन सुनो॥ ३३॥

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