॥ श्रीहरिः ॥
सोमोऽभूद्ब्रह्मणोंऽशेन दत्तो विष्णोस्तु योगवित्।
दुर्वासाः शङ्करस्यांशो निबोधाङ्गिरसः प्रजाः॥ ३३
somo'bhūdbrahmaṇoṃ'śena datto viṣṇostu yogavit|
durvāsāḥ śaṅkarasyāṃśo nibodhāṅgirasaḥ prajāḥ|| 33
अर्थ
ब्रह्माजीके अंशसे चन्द्रमा, विष्णुके अंशसे योगवेत्ता दत्तात्रेयजी और महादेवजीके अंशसे दुर्वासा ऋषि अत्रिके पुत्ररूपमें प्रकट हुए। अब अंगिरा ऋषिकी सन्तानोंका वर्णन सुनो॥ ३३॥
सोमोऽभूद्ब्रह्मणोंऽशेन दत्तो विष्णोस्तु योगवित्।
दुर्वासाः शङ्करस्यांशो निबोधाङ्गिरसः प्रजाः॥ ३३
ब्रह्माजीके अंशसे चन्द्रमा, विष्णुके अंशसे योगवेत्ता दत्तात्रेयजी और महादेवजीके अंशसे दुर्वासा ऋषि अत्रिके पुत्ररूपमें प्रकट हुए। अब अंगिरा ऋषिकी सन्तानोंका वर्णन सुनो॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 408) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/33/