श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.44

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

तस्मा एवं जगत्स्रष्ट्रे प्रधानपुरुषेश्‍वरः।

व्यज्येदं स्वेन रूपेण कञ्जनाभस्तिरोदधे॥ ४४

tasmā evaṃ jagatsraṣṭre pradhānapuruṣeśvaraḥ|

vyajyedaṃ svena rūpeṇa kañjanābhastirodadhe|| 44

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—प्रकृति और पुरुषके स्वामी कमलनाभ भगवान् सृष्टिकर्ता ब्रह्माजीको इस प्रकार जगत‍्की अभिव्यक्ति करवाकर अपने उस नारायणरूपसे अदृश्य हो गये॥ ४४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे नवमोऽध्यायः॥ ९॥

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