श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.40

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

य एतेन पुमान्‍नित्यं स्तुत्वा स्तोत्रेण मां भजेत्।

तस्याशु सम्प्रसीदेयं सर्वकामवरेश्‍वरः॥ ४०

ya etena pumānnityaṃ stutvā stotreṇa māṃ bhajet|

tasyāśu samprasīdeyaṃ sarvakāmavareśvaraḥ|| 40

अर्थ

मैं समस्त कामनाओं और मनोरथोंको पूर्ण करनेमें समर्थ हूँ। जो पुरुष नित्यप्रति इस स्तोत्रद्वारा स्तुति करके मेरा भजन करेगा, उसपर मैं शीघ्र ही प्रसन्‍न हो जाऊँगा॥ ४०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें