श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

रूपं यदेतदवबोधरसोदयेन

शश्‍वन्‍निवृत्ततमसः सदनुग्रहाय।

आदौ गृहीतमवतारशतैकबीजं

यन्‍नाभिपद्मभवनादहमाविरासम् ॥ २

rūpaṃ yadetadavabodharasodayena

śaśvannivṛttatamasaḥ sadanugrahāya|

ādau gṛhītamavatāraśataikabījaṃ

yannābhipadmabhavanādahamāvirāsam || 2

अर्थ

देव! आपकी चित् शक्तिके प्रकाशित रहनेके कारण अज्ञान आपसे सदा ही दूर रहता है। आपका यह रूप, जिसके नाभिकमलसे मैं प्रकट हुआ हूँ, सैकड़ों अवतारोंका मूल कारण है। इसे आपने सत्पुरुषोंपर कृपा करनेके लिये ही पहले-पहल प्रकट किया है॥ २॥

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