॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.9.2
रूपं यदेतदवबोधरसोदयेन
शश्वन्निवृत्ततमसः सदनुग्रहाय।
आदौ गृहीतमवतारशतैकबीजं
यन्नाभिपद्मभवनादहमाविरासम् ॥ २
rūpaṃ yadetadavabodharasodayena
śaśvannivṛttatamasaḥ sadanugrahāya|
ādau gṛhītamavatāraśataikabījaṃ
yannābhipadmabhavanādahamāvirāsam || 2
अर्थ
देव! आपकी चित् शक्तिके प्रकाशित रहनेके कारण अज्ञान आपसे सदा ही दूर रहता है। आपका यह रूप, जिसके नाभिकमलसे मैं प्रकट हुआ हूँ, सैकड़ों अवतारोंका मूल कारण है। इसे आपने सत्पुरुषोंपर कृपा करनेके लिये ही पहले-पहल प्रकट किया है॥ २॥