श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तिर्यङ्मनुष्यविबुधादिषु जीवयोनि-

ष्वात्मेच्छयाऽऽत्मकृतसेतुपरीप्सया यः।

रेमे निरस्तरतिरप्यवरुद्धदेह-

स्तस्मै नमो भगवते पुरुषोत्तमाय॥ १९

tiryaṅmanuṣyavibudhādiṣu jīvayoni-

ṣvātmecchayā''tmakṛtasetuparīpsayā yaḥ|

reme nirastaratirapyavaruddhadeha-

stasmai namo bhagavate puruṣottamāya|| 19

अर्थ

आप पूर्णकाम हैं, आपको किसी विषयसुखकी इच्छा नहीं है, तो भी आपने अपनी बनायी हुई धर्ममर्यादाकी रक्षाके लिये पशु-पक्षी, मनुष्य और देवता आदि जीवयोनियोंमें अपनी ही इच्छासे शरीर धारण कर अनेकों लीलाएँ की हैं। ऐसे आप पुरुषोत्तमभगवान्‌को मेरा नमस्कार है॥ १९॥✎ 238

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #238 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् को → पुरुषोत्तमभगवान्‌को

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