इसके पश्चात् परम दयालु पराशरजीने पुलस्त्य मुनिके कहनेसे वह आदिपुराण मुझसे कहा। वत्स! श्रद्धालु और सदा अनुगत देखकर अब वही पुराण मैं तुम्हें सुनाता हूँ॥ ९॥✎ 233
प्रोवाच मह्यं स दयालुरुक्तो
मुनिः पुलस्त्येन पुराणमाद्यम्।
सोऽहं तवैतत्कथयामि वत्स
श्रद्धालवे नित्यमनुव्रताय॥ ९
इसके पश्चात् परम दयालु पराशरजीने पुलस्त्य मुनिके कहनेसे वह आदिपुराण मुझसे कहा। वत्स! श्रद्धालु और सदा अनुगत देखकर अब वही पुराण मैं तुम्हें सुनाता हूँ॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.8.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 268) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/8/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)