श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ततो निवृत्तोऽप्रतिलब्धकामः

स्वधिष्ण्यमासाद्य पुनः स देवः।

शनैर्जितश्वासनिवृत्तचित्तो

न्यषीददारूढसमाधियोगः ॥ २१

tato nivṛtto'pratilabdhakāmaḥ

svadhiṣṇyamāsādya punaḥ sa devaḥ|

śanairjitaśvāsanivṛttacitto

nyaṣīdadārūḍhasamādhiyogaḥ || 21

अर्थ

अन्तमें विफलमनोरथ हो वे वहाँसे लौट आये और पुनः अपने आधारभूत कमलपर बैठकर धीरे-धीरे प्राणवायुको जीतकर चित्तको निःसंकल्प किया और समाधिमें स्थित हो गये॥ २१॥

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