श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तस्माद्युगान्तश्‍वसनावघूर्ण-

जलोर्मिचक्रात्सलिलाद्विरूढम् ।

उपाश्रितः कञ्जमु लोकतत्त्वं

नात्मानमद्धाविददादिदेवः ॥ १७

tasmādyugāntaśvasanāvaghūrṇa-

jalormicakrātsalilādvirūḍham |

upāśritaḥ kañjamu lokatattvaṃ

nātmānamaddhāvidadādidevaḥ || 17

अर्थ

उस समय प्रलयकालीन पवनके थपेड़ोंसे उछलती हुई जलकी तरंगमालाओंके कारण उस जलराशिसे ऊपर उठे हुए कमलपर विराजमान आदिदेव ब्रह्माजीको अपना तथा उस लोकतत्त्वरूप कमलका कुछ भी रहस्य न जान पड़ा॥ १७॥✎ 235 236

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #235 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् की → विष्णुभगवान्‌की
  • #236 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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