श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

सेयं भगवतो माया यन्‍नयेन विरुध्यते।

ईश्‍वरस्य विमुक्तस्य कार्पण्यमुत बन्धनम्॥ ९

seyaṃ bhagavato māyā yannayena virudhyate|

īśvarasya vimuktasya kārpaṇyamuta bandhanam|| 9

अर्थ

श्रीमैत्रेयजीने कहा—जो आत्मा सबका स्वामी और सर्वथा मुक्तस्वरूप है, वही दीनता और बन्धनको प्राप्त हो—यह बात युक्तिविरुद्ध अवश्य है; किन्तु वस्तुतः यही तो भगवान्‌की माया है॥ ९॥✎ 227

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #227 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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