भगवान्ने अपनी गुणमयी मायासे जगत्की रचना की है, उसीसे वे इसका पालन करते हैं और फिर उसीसे संहार भी करेंगे॥ ४॥✎ 226
अस्राक्षीद्भगवान् विश्वं गुणमय्याऽऽत्ममायया।
तया संस्थापयत्येतद्भूयः प्रत्यपिधास्यति॥ ४
भगवान्ने अपनी गुणमयी मायासे जगत्की रचना की है, उसीसे वे इसका पालन करते हैं और फिर उसीसे संहार भी करेंगे॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.7.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 263) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/7/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)