श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.39

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

निमित्तानि च तस्येह प्रोक्तान्यनघ सूरिभिः।

स्वतो ज्ञानं कुतः पुंसां भक्तिर्वैराग्यमेव वा॥ ३९

nimittāni ca tasyeha proktānyanagha sūribhiḥ|

svato jñānaṃ kutaḥ puṃsāṃ bhaktirvairāgyameva vā|| 39

अर्थ

पवित्रात्मन् विद्वानोंने उस ज्ञानकी प्राप्तिके क्या-क्या उपाय बतलाये हैं? क्योंकि मनुष्योंको ज्ञान, भक्ति अथवा वैराग्यकी प्राप्ति अपने-आप तो हो नहीं सकती॥ ३९॥

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