श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तत्त्वानां भगवंस्तेषां कतिधा प्रतिसंक्रमः।

तत्रेमं क उपासीरन् क उ स्विदनुशेरते॥ ३७

tattvānāṃ bhagavaṃsteṣāṃ katidhā pratisaṃkramaḥ|

tatremaṃ ka upāsīran ka u svidanuśerate|| 37

अर्थ

भगवन्! उन महदादि तत्त्वोंका प्रलय कितने प्रकारका है? तथा जब भगवान् योगनिद्रामें शयन करते हैं, तब उनमेंसे कौन-कौन तत्त्व उनकी सेवा करते हैं और कौन उनमें लीन हो जाते हैं?॥ ३७॥

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