श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.6.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

हृदयं चास्य निर्भिन्‍नं चन्द्रमा धिष्ण्यमाविशत्।

मनसांशेन येनासौ विक्रियां प्रतिपद्यते॥ २४

hṛdayaṃ cāsya nirbhinnaṃ candramā dhiṣṇyamāviśat|

manasāṃśena yenāsau vikriyāṃ pratipadyate|| 24

अर्थ

फिर इसमें हृदय प्रकट हुआ; उसमें अपने अंश मनके सहित चन्द्रमा स्थित हुआ। इस मनःशक्तिके द्वारा जीव संकल्प-विकल्पादिरूप विकारोंको प्राप्त होता है॥ २४॥

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