उसके जाग्रत् होते ही देवताओंके लिये कितने स्थान प्रकट हुए—यह मैं बतलाता हूँ, सुनो॥ ११॥✎ 220
अथ तस्याभितप्तस्य कति चायतनानि ह।
निरभिद्यन्त देवानां तानि मे गदतः शृणु॥ ११
उसके जाग्रत् होते ही देवताओंके लिये कितने स्थान प्रकट हुए—यह मैं बतलाता हूँ, सुनो॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 260) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/6/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#220 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने