श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.6.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अथ तस्याभितप्तस्य कति चायतनानि ह।

निरभिद्यन्त देवानां तानि मे गदतः शृणु॥ ११

atha tasyābhitaptasya kati cāyatanāni ha|

nirabhidyanta devānāṃ tāni me gadataḥ śṛṇu|| 11

अर्थ

उसके जाग्रत् होते ही देवताओंके लिये कितने स्थान प्रकट हुए—यह मैं बतलाता हूँ, सुनो॥ ११॥✎ 220

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #220 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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