इसी समय व्यासजीके प्रिय मित्र परम भागवत सिद्ध मैत्रेयजी लोकोंमें स्वच्छन्द विचरते हुए वहाँ आ पहुँचे॥ ९॥
तस्मिन्महाभागवतो द्वैपायनसुहृत्सखा।
लोकाननुचरन् सिद्ध आससाद यदृच्छया॥ ९
इसी समय व्यासजीके प्रिय मित्र परम भागवत सिद्ध मैत्रेयजी लोकोंमें स्वच्छन्द विचरते हुए वहाँ आ पहुँचे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 249) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/4/9/