श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अद्राक्षमेकमासीनं विचिन्वन् दयितं पतिम्।

श्रीनिकेतं सरस्वत्यां कृतकेतमकेतनम्॥ ६

adrākṣamekamāsīnaṃ vicinvan dayitaṃ patim|

śrīniketaṃ sarasvatyāṃ kṛtaketamaketanam|| 6

अर्थ

वहाँ मैंने देखा कि जो सबके आश्रय हैं किन्तु जिनका कोई और आश्रय नहीं है, वे प्रियतम प्रभु शोभाधाम श्यामसुन्दर सरस्वतीके तटपर अकेले ही बैठे हैं॥ ६॥

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