॥ श्रीहरिः ॥
अस्माल्लोकादुपरते मयि ज्ञानं मदाश्रयम्।
अर्हत्युद्धव एवाद्धा सम्प्रत्यात्मवतां वरः॥ ३०
asmāllokāduparate mayi jñānaṃ madāśrayam|
arhatyuddhava evāddhā sampratyātmavatāṃ varaḥ|| 30
अर्थ
‘अब इस लोकसे मेरे चले जानेपर संयमीशिरोमणि उद्धव ही मेरे ज्ञानको ग्रहण करनेके सच्चे अधिकारी हैं॥ ३०॥✎ 208
अस्माल्लोकादुपरते मयि ज्ञानं मदाश्रयम्।
अर्हत्युद्धव एवाद्धा सम्प्रत्यात्मवतां वरः॥ ३०
‘अब इस लोकसे मेरे चले जानेपर संयमीशिरोमणि उद्धव ही मेरे ज्ञानको ग्रहण करनेके सच्चे अधिकारी हैं॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 252) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/4/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #208 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्ने