श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.33.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इति प्रर्दश्य भगवान् सतीं तामात्मनो गतिम्।

स्वमात्रा ब्रह्मवादिन्या कपिलोऽनुमतो ययौ॥ १२

iti prardaśya bhagavān satīṃ tāmātmano gatim|

svamātrā brahmavādinyā kapilo'numato yayau|| 12

अर्थ

मैत्रेयजी कहते हैं—इस प्रकार अपने श्रेष्ठ आत्मज्ञानका उपदेश कर श्रीकपिलदेवजी अपनी ब्रह्मवादिनी जननीकी अनुमति लेकर वहाँसे चले गये॥ १२॥

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