मैत्रेयजी कहते हैं—इस प्रकार अपने श्रेष्ठ आत्मज्ञानका उपदेश कर श्रीकपिलदेवजी अपनी ब्रह्मवादिनी जननीकी अनुमति लेकर वहाँसे चले गये॥ १२॥
इति प्रर्दश्य भगवान् सतीं तामात्मनो गतिम्।
स्वमात्रा ब्रह्मवादिन्या कपिलोऽनुमतो ययौ॥ १२
मैत्रेयजी कहते हैं—इस प्रकार अपने श्रेष्ठ आत्मज्ञानका उपदेश कर श्रीकपिलदेवजी अपनी ब्रह्मवादिनी जननीकी अनुमति लेकर वहाँसे चले गये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.33.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 402) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/33/12/