कपिलदेवजीने कहा—माताजी! मैंने तुम्हें जो यह सुगम मार्ग बताया है, इसका अवलम्बन करनेसे तुम शीघ्र ही परमपद प्राप्त कर लोगी॥ १०॥
मार्गेणानेन मातस्ते सुसेव्येनोदितेन मे।
आस्थितेन परां काष्ठामचिरादवरोत्स्यसि॥ १०
कपिलदेवजीने कहा—माताजी! मैंने तुम्हें जो यह सुगम मार्ग बताया है, इसका अवलम्बन करनेसे तुम शीघ्र ही परमपद प्राप्त कर लोगी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.33.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 401) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/33/10/