श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.33.10

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

कपिल उवाच

मार्गेणानेन मातस्ते सुसेव्येनोदितेन मे।

आस्थितेन परां काष्ठामचिरा१दवरोत्स्यसि॥ १०

mārgeṇānena mātaste susevyenoditena me|

āsthitena parāṃ kāṣṭhāmacirādavarotsyasi|| 10

अर्थ

कपिलदेवजीने कहा—माताजी! मैंने तुम्हें जो यह सुगम मार्ग बताया है, इसका अवलम्बन करनेसे तुम शीघ्र ही परमपद प्राप्त कर लोगी॥ १०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—दधिरो०।

    (मुद्रित पृष्ठ 401)

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