श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

यदा चाहीन्द्रशय्यायां शेतेऽनन्तासनो हरिः।

तदा लोका लयं यान्ति त एते गृहमेधिनाम्॥ ४

yadā cāhīndraśayyāyāṃ śete'nantāsano hariḥ|

tadā lokā layaṃ yānti ta ete gṛhamedhinām|| 4

अर्थ

जिस समय प्रलयकालमें शेषशायी भगवान् शेषशय्यापर शयन करते हैं, उस समय सकाम गृहस्थाश्रमियोंको प्राप्त होनेवाले ये सब लोक भी लीन हो जाते हैं॥ ४॥

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