श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

अथ तं सर्वभूतानां हृत्पद्मेषु कृतालयम्।

श्रुतानुभावं शरणं व्रज भावेन भामिनि३॥ ११

atha taṃ sarvabhūtānāṃ hṛtpadmeṣu kṛtālayam|

śrutānubhāvaṃ śaraṇaṃ vraja bhāvena bhāmini|| 11

अर्थ

इसलिये माताजी! अब तुम भी अत्यन्त भक्तिभावसे उन श्रीहरिकी ही चरण-शरणमें जाओ; समस्त प्राणियोंका हृदयकमल ही उनका मन्दिर है और तुमने भी मुझसे उनका प्रभाव सुन ही लिया है॥ ११॥✎ 345 346

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—भाविनि।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 396)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #345 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में
  • #346 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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