देहके साथ-ही-साथ अभिमान और क्रोध बढ़ जानेके कारण वह कामपरवश जीव अपना ही नाश करनेके लिये दूसरे कामी पुरुषोंके साथ वैर ठानता है॥ २९॥
सह देहेन मानेन वर्धमानेन मन्युना।
करोति विग्रहं कामी कामिष्वन्ताय चात्मनः॥ २९
देहके साथ-ही-साथ अभिमान और क्रोध बढ़ जानेके कारण वह कामपरवश जीव अपना ही नाश करनेके लिये दूसरे कामी पुरुषोंके साथ वैर ठानता है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.31.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 393) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/31/29/