श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.31.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

सह देहेन मानेन वर्धमानेन मन्युना।

करोति विग्रहं कामी कामिष्वन्ताय चात्मनः॥ २९

saha dehena mānena vardhamānena manyunā|

karoti vigrahaṃ kāmī kāmiṣvantāya cātmanaḥ|| 29

अर्थ

देहके साथ-ही-साथ अभिमान और क्रोध बढ़ जानेके कारण वह कामपरवश जीव अपना ही नाश करनेके लिये दूसरे कामी पुरुषोंके साथ वैर ठानता है॥ २९॥

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