उसके सहसा ठेलनेपर वह बालक अत्यन्त व्याकुल हो नीचे सिर करके बड़े कष्टसे बाहर निकलता है। उस समय उसके श्वासकी गति रुक जाती है और पूर्वस्मृति नष्ट हो जाती है॥ २३॥✎ 343
तेनावसृष्टः सहसा कृत्वावाक् शिर आतुरः।
विनिष्क्रामति कृच्छ्रेण निरुच्छ्वासो हतस्मृतिः॥ २३
उसके सहसा ठेलनेपर वह बालक अत्यन्त व्याकुल हो नीचे सिर करके बड़े कष्टसे बाहर निकलता है। उस समय उसके श्वासकी गति रुक जाती है और पूर्वस्मृति नष्ट हो जाती है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.31.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 392) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/31/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)